आसमान में उड़कर भी तो रो रही है
अन्दर से दर्द पानी बनकर बह रही है
बादल ! तुझे सब खुशकिस्मत समझे पर
तू क्यों दुखी कहानियाँ कह रही है?
तेरी रोने पर जाग उड़ने लगी
धर्ती से खुशबु तो वो अच्छे लगे
नया जीवन का खिलना अच्छा लगे
सबकी प्यास बुझाना अच्छा लगे
मगर तेरी कारण देख री घटा
किसीकी तो सबकुछ बह रही है।
खुले आम रो सकती है तू बार-बार
छुपके भी न रो पाती हूँ मै तो यार
जैसे बूँदो से तेरा काला है रंग वैसे
चेहरे की रंग छुपाने हँसना है हरबार
न जाने कितने दर्द मिला है दिल को
अब हम जिस्म -ए -दर्द भी सह रही हैं।
एक हवा का झोंका दस्तक दीदरवाज़े में ऐसा फिर से मेरा,मुरझाया फूल खिलने लगीआँगन महका…
Welcome to the hilarious side of family life—where asking simple questions is like tossing a…
S. Janaki, lovingly called Janaki amma, was more than a voice for me; she was…
"Do not believe the blind men who touch an elephant and claim, 'This is a…
25 വർഷത്തെ കസ്റ്റമർ കെയർ അനുഭവത്തിൽ പലതവണ നേരിട്ട ഒരു രസകരമായ പ്രശ്നം ആണ് ഒരേ പേരിലുള്ള ഉപഭോക്താക്കളുമായി എനിക്ക്…
‘Mujhe Tum Nazar Se Gira To Rahe Ho’ by Mehdi Hassan is one of my…
This website uses cookies.
View Comments
😍😍