ज़माना लगे

ज़माना लगे।

पल दो पल में आग लग जाए
पर बुझाने के लिए ज़माना लगे। 

बुझा भी दिया था तो क्या हुआ
ज़ख्म भरने के लिए ज़माना लगे। 

वक़्त ने पत्थर कुछ ऐसा मारा
शीशा टूटने के लिए ज़माना लगे। 

मोल क्या ज़िंदगी की, ढूँढे तो
ये समझने के लिए ज़माना लगे। 

मंज़िल करीब है, फिर भी
उसे पाने के लिए ज़माना लगे। 

Similar Posts

  • |

    വായനയുടെ പ്രസക്തി കുട്ടികളിൽ

    വായനയുടെ പ്രസക്തി കുട്ടികളിൽ എന്ന തലക്കെട്ട് കാണുമ്പോൾ സ്വാഭാവികമായും നിങ്ങൾ കരുതുന്ന പോലെ വായനാദിനത്തെയും പി എൻ പണിക്കർ എന്ന മഹാനെയും കുറിച്ചുമല്ല ഞാനിന്നു പറയുന്നത്. ഇന്ന് എല്ലാവരും അതൊക്കെ ഒരുപാട് വായിച്ചിട്ടുണ്ടാകും സോഷ്യൽ മീഡിയയിലും പത്രത്തിലും ഒക്കെ ആയി. എനിക്ക് പങ്കു വെക്കാനുള്ളത് വായനയെ കുറിച്ചുള്ള എന്റേതായ ചില അനുഭവങ്ങളും തിരിച്ചറിവുകളും അഭിപ്രായങ്ങളുമാണ്. ഈ ഡിജിറ്റൽ യുഗത്തിൽ, എന്നെ പോലെ ഒരു പുസ്തകം കയ്യിലെടുത്തു മനസ്സിരുത്തി വായിച്ചിട്ട് ആണ്ടുകളായവരോടും ഇന്നത്തെ വായന എന്തെന്നറിയാത്ത പുതു തലമുറയിലെ…

  • |

    Honton Se Chhoolo Tum Song Lyrics

    प्रेम गीत फिल्म का यह गाना मेरा सर्वकालिक पसंदीदा क्लासिक हिट गाना हैं। प्रेम गीत जगजीत सिंह जी के संगीत निर्देशक के रूप में पहली फिल्म थी। यक़ीनन, उनकी मस्मारिक संगीत से और उनकी ही दिलकश आवाज़ में यह गाना तो हर किसी के दिलको और होटों को छू लेता ही हैं। पहली बार मैंने…

  • |

    गुमराह

    वक्त ने मुझे गुमराह किया था यह नहीं है मेरी मंज़िल। जिस मोड़ में राह झूठा था उसकी खोज में है अब दिल।  यहाँ से निकलजाने की सोचूँ या अपनी मंजिल को खोजूं ?क्या करूँ ? क्या ना करूँ ? कभी सफर ही हत्म करना मैं सोचूँ।  ज़िंदगी तो कुछ हल्का-सा था कब यह भारी से भारी होगया ?फूलों से सजी राहों में कब काँटें बरसना ज़ारी होगया ? मौसम की नादानियाँ ही देखो प्यास…

  • |

    हवा का झोंका

    एक हवा का झोंका दस्तक दी दरवाज़े में ऐसे फिर से मेरा। मुरझाया फूल खिलने लगी आँगन महका फिर से मेरा ।। बादल बरसना छोड़ दिया था खुशबु महकना भूल झुका था,पवन जो सरकाया आँचल मेरादिल आज धड़का फिर से मेरा ।। तूफ़ान मे कश्ती फटक गयी थीजब दूर साहिल दिखने लगी,बेरंग दुनिया मे रंग भरा आँखें चमका फिर से मेरा ।। अश्कों की बरसात थम गया तो हंसी के फूल खिलने लग गयी आशाएँ…

  • |

    बादल की आँसू

    आसमान में उड़कर भी तो रो रही है अन्दर से दर्द पानी बनकर बह रही है बादल ! तुझे सब खुशकिस्मत समझे पर तू क्यों दुखी कहानियाँ कह रही है? तेरी रोने  पर जाग उड़ने लगी धर्ती से खुशबु तो वो अच्छे लगे नया जीवन का खिलना अच्छा लगे सबकी प्यास बुझाना अच्छा लगे मगर तेरी कारण देख री घटा किसीकी तो सबकुछ बह रही है।  खुले आम रो सकती है…

  • |

    भूल

    हम से न जाने कैसे ये भूल हुई जो जुगनू को समझ लिया सितारा। क्यों हमने सोचा अकेली राहों में ,घोर अँधेरे में मिल ही लिया सहारा।। अब भी हम तैर रहे हैं थक के भी,उस पार अगर हो या न हो किनारा। बिखरी जुल्फों को ओर बिखरा दियाइक हवा का झोंका भी न इसे सवारा।। निगाहों के आगे दूर दूर तक है वीरानी फिर क्यों दिल होले से…

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.