थोड़ी दूर तुम साथ चलो

थोड़ी दूर तुम साथ चलो

उम्रभर किसीको कोई साथ न देता
तुम थोड़ी दूर तो साथ चलो l
मंजिल और राहें दोनों अलग हैं
मगर थोड़ी दूर तो साथ चलो ll

तनहा गुज़ारा हैं ये जिंदगानी
तन्हाई के ही साथ रही हैं,
जीलेंगे तनहा फिर हम ख़ुशी से
बस थोड़ी दूर तुम साथ चलो ll

लम्बी हैं राहें कई दूर हैं मंजिल
कहीं पे जुदा अपनी राहें भी होगी,
पल भर के साथ निभाएंगे सभी
लेकिन थोड़ी दूर ‘तुम’ साथ चलो ll

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