Murjhaya Phool Khilne Lagi
एक हवा का झोंका दस्तक दी
दरवाज़े में ऐसा फिर से मेरा,
मुरझाया फूल खिलने लगी
आँगन महका फिर से मेरा।
बादल बरसना छोड़ दिया था
खुशबु महकना भूल चूका था
पवन जो सरकाया आँचल मेरा
दिल आज दड़का फिर से मेरा।
तूफ़ान में कश्ती भटक गई थी
जब दूर साहिल दिखने लगी;
बेरंग दुनिया में रंग भरा,
आँखें चमका फिर से मेरा।
अश्कों की बरसात दम गई तो
हँसी के फूल खिलने लग गए हैं
आशाएं झूले में झूलने लगी हैं
पायलिया झनका फिर से मेरा।
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