सपने बुनते ही रहे हैं दिल
सपने बुनते ही रहे हैं दिल मेरे ज़िंदगी के हरेक पल। इससे क्या मिलने को रखा है, पर यह न जाने दिल पागल। नहीं कोई एक ही तो मकसदवक्त ने कहा तू राह बदल।वक्त का क्या होता भरोसापल भी युग सा होता है, टल। ख्वाबों की राहों में नहीं कांटेहक़ीक़त काँटों की ओढा कंबल। खुमारी…










